What is Pranic Healing

प्राणिक हीलिंग क्या है ?

प्राणिक हीलिंग एक ऐसी चिकित्सा पद्ति है, जो दुनिया के कई देशो में पूरक चिकित्सा के रूप में मान्य है। यह एक प्राचीन विज्ञान और उपचार की कला है, जो प्राण ऊर्जा ( Life Energy ) द्वारा शरीर को रोग मुक्त करती है। इस पद्ति में बिना स्पर्श व बिना दवा के ईलाज किया जाता है। ब्रह्मांड के कण-कण में प्राण ऊर्जा प्रवाहित है, मनुष्य के अन्दर व बाहर इसी प्राण ऊर्जा का विस्तार है, मानव इसी ऊर्जा से जन्म लेता है, इसी के सहयोग से बड़ा होता है तथा उसका सम्पूर्ण जीवन चक्र इसी ऊर्जा के अन्तर्गत विकसित होता है। इसी प्राण ऊर्जा का अभाव ही रोगो को जन्म देता है तथा इसका लुप्त होना ही जीवन का अन्त है। यह प्राण ऊर्जा ही समस्त चराचर जीवों के प्राणो का सार है। इस सृष्टि की रचना इसी प्राण ऊर्जा से हुई है।

प्राणिक हीलिंग वेदों में वर्णित एक पुरातन भारतीय पद्ति है। जिसका प्रचार बौद्धकाल में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा पूर्वी देशों में हुआ । चीनी मूल के फिलीपिन्स नागरिक मास्टर चोआ कोक सूई जो कि पेशे से केमिकल इंजीनियर थे उन्होने अपने 30 साल के अथक परिश्रम एवं शोध के उपरान्त भारत की इस पुरातन पद्ति के वैज्ञानिक पहलू को बहुत सरल रूप में प्रस्तुत किया है। यह योग विध्या भारत में ही नहीं बल्कि इंग्लैंड और अमेरिका जैसे 100 देशो में फैल चुकी है। वहां के डाॅक्टर भी अब अपने ईलाज के साथ ही प्राणिक हीलिंग से उपचार कर रहे है। दिल्ली के अपोलो हाॅस्पीटल में प्राणिक हीलिंग का एक विभाग खुला हुआ है भारत जैसे गरीब देश के लिये प्राणिक हीलिंग एक वरदान है। इस विध्या से समस्त शारीरिक, मानसिक, एवं भावनात्मक रोगों का उपचार किया जाता है।

प्राणिक हीलिंग एक "बिना स्पर्श व बिना दवा" उपचार करने की पद्ति है यह अन्य उपचार पद्तियो का विरोध नहीं करती है, इस पद्ति से अनेको बार असाध्य रोगों में चमत्कारिक परिणाम प्राप्त होते है।

Pranic-Energy-ancient-times-Energy-echnology

प्राणिक हीलिंग का वैज्ञानिक आधार:-

what-is-pranic-healing-2प्राणिक हीलिंग का मुख्य आधार ऊर्जा है। जब तक हमारे अन्दर ऊर्जा है तब तक हम कोई भी कार्य कर सकते है, यदि ऊर्जा कम हो जाती है तो कार्य क्षमता भी कम हो जाती है। यह पूरा विश्व ऊर्जा से संचालित होता है । यहां पर भांति भांति की ऊर्जा मौजूद है। हम किस तरह से ऊर्जा को अन्दर ले, इसके बारे में अनभिज्ञ हैं। अज्ञानवश हम ऊर्जा का सही इस्तेमाल नहीं कर पा रहे है। वेदों में कहा गया है कि प्रत्येक जीव की संरचना पंच तत्वों से हुई है ।

मानव शरीर 11 चक्रों द्वारा संचालित होता है, इनमें से सात चक्र मुख्य होते है। चक्र तेजी से घुमने वाले ऊर्जा केन्द्र होते है जो ब्रह्माण्ड से ऊर्जा को शोख कर शरीर के विभिन्न भागों तक पहुचातें है। इन्हीं चक्रों के माध्यम से शरीर में प्राण ऊर्जा सन्तुलित एवं लयबद् रूप से परिक्रमा करती रहती है तथा यही मनुष्य के जीवन का सार है। जब कभी बाहरी या किन्हीं आन्तरिक कारणों से शरीर में प्राण ऊर्जा का असन्तुलन हो जाता है तो रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और बीमारियां उत्पन्न होना आरम्भ हो जाती है। प्राणिक हीलिंग के द्वारा होने वाली बीमारियों का पता 3 माह पूर्व ही लग जाता है। चक्रों पर चर्चा करने से पहले ओरा (Aura) की चर्चा जरूरी है।